ख़याल गा रहे हैं मिश्रा बंधु
हारमोनियम पर हैं महमूद धौलपुरी
और तबला बजा रहे हैं अकरम ख़ान
प्रेक्षागृह भरा है देसी-विदेशी श्रोताओं से
आरएसएस प्रमुख
कू प सुदर्शन से एक सवाल
धर्म बड़ा कि संगीत?
हारमोनियम पर हैं महमूद धौलपुरी
और तबला बजा रहे हैं अकरम ख़ान
प्रेक्षागृह भरा है देसी-विदेशी श्रोताओं से
आरएसएस प्रमुख
कू प सुदर्शन से एक सवाल
धर्म बड़ा कि संगीत?





8 comments:
निर्भर करता है आप सवाल कहां पूछ रहे हैं. मंच पर खडा करवा के पूछेंगे तो नैचुरली आदमी अदबदाकर धर्म कहेगा (वैसे हो सकता है कूपसु प्रायवेटली कान में फुसफुसाकर भी वही जवाब दें).
हद हाल है यार, यह तो सबको पता है कि इंसानियत और इंसानी गुण ही बड़े हैं लेकिन मेरा सवाल आपसे है कि आप ये सवाल सुदर्शन से ही क्यों पूछ रहे हैं पोप या खलीफाओं से पूछने में आपकी फटती है क्या?
यही सवाल इरफान से करें,"देश बड़ा या धर्म"
या इन संगीतकारो को कोई तकलिफ नहीं फिर आपको ही इस देश में क्यों हो रही होती है?
विचार शुद्धी की आवश्यकता आपको है. पहले र.स्व.स. के बारे में पूरा जान लें. वर्तमान राष्ट्रपति को नामांकित किसने किया था?
कविता की ऐसी कारीगरी करोगे तो ऐसे ही मीठे, रसभरे जवाब पाओगे. बेहतर होता कविता के लिए तुम बकरी या गिलहरी जैसा कोई मासूम विषय चुनते. फिर गुणीजन दाद भी देते. अभय तिवारी के शब्दों को उधार लेते हुए कहूंगा, आगे के लिए चेते रहो.
-प्रमोद सिंह
क्यों प्रमोद भाई अपने दोस्त को जवाब नहीं सुझा पा रहे हो तो ताने कस रहे हो? बस इतना ही तो पूछा है कि दिल्ली - बम्बई के इन कॉफी हाउसों से लेकर आपके इस साइबेरिया कॉफी हाउस के प्यालों में हमेशा सुदर्शन जैसे नामों पर ही क्यों तुफान उठता है? वाकई कुछ तूफान है दिल में तो रास्ते में आने वालों में फर्क क्यों? आओ उड़ा ले चले सबको एक साथ... वो चाहे पोप का पाप हो, खलीफों का फितूर या फिर काफिरों का दोष, सबको रौंदों ना! या फिर इसमें भी आरक्षण लागू है?
क्या आरएसएस प्रमुख ने हाल में ऐसा कुछ कहा है, जिस के कारण उन से यह प्रश्न पूछा जा रहा है। भारत ही वह देश है जहाँ हर धर्म के कलाकार भी सफल हैं, संगीतकार भी, नेता भी और अभिनेता भी, और धर्म का सवाल कभी नहीं उठाया जाता - आरएसएस द्वारा भी नहीं। फिर यह सवाल क्यों? यदि इस पोस्ट का इशारा किसी खास खबर की ओर है तो उस का लिंक दिया जाए। अन्यथा यह बेपेन्दी का ताना है।
आपके प्रश्न बेतुके तथा बेमाने है, संद्य द्वारा न कभी धार्मिक भावनावों को कुचला गया है नही किसी धर्म को अपमानित किया गया है। यही संद्य है जिसने मुस्मिल नेता नजमा हेपदुल्ला को सम्मानित किया था।
संद्य हिन्दुत्व की बात है तो संद्य हमेशा से ही राष्ट्र भक्ति की बात कहता है।
कुंठा से भरपूर सवाल है। संघ को जितना बुरा आपने सोच लिया उतना बुरा भी नहीं है। माफी चाहूंगा मैं भी मुसलमान हूं और संघ के शहर नागपुर से ताल्लुक रखता हूं। धन्यवाद।
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