Saturday, March 17, 2007

बेलूर मठ में

मैला हो गया है पानी
फिर भी मठ की सीढ़ियां उतरकर
सन्यासी जाएंगे गंगा में नहाने
सिर मुढ़ा गेरुवे वस्त्र धारण किए
नंगे पैर खड़े करेंगे प्रार्थनाएं

सारी इच्छाओं पर हावी रहेगी मुक्ति की इच्छा
लेकिन संकरे होते जाएंगे यंत्रणा के क़ैदखाने

एकांत में दुख बहेगा आंखों से
फिर भी एक दुख बचा रहेगा आंखों में
वो किनारे खड़े पकड़े रहेंगे उस टूटी-फूटी नाव को
जो कभी मिली थी पार जाने के लिए

भले ही कोई योद्धा पुकार ले उन्हें
वो हमेशा हाशिए पर मिलेंगे रणभूमि के

2 comments:

Pratyaksha said...

बढिया !

UTTARANCHAL said...

The way West Bengol govt is grabing farmer,s land for industry is very bad.

no ammount of money is enough to compensate for snatching the agricultural land from farmers......

shame shame...

is this a goverment or real estate agent?

anand basera, ,mumbai